Training

नाविकों एवं नाव मालिकों के प्रशिक्षण हेतु मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण कार्यक्रम



विगत वर्षों में हुई विभिन्न नौका दुर्घटनाओं में अलग-अलग स्थानों पर बहुत अधिक संख्या में लोगों की मृत्यु हुई है। इन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री बिहार द्वारा दिनांक 30 जून 2017 को बाढ़ एवं अल्प वर्षापात की स्थिति में की जाने वाली तैयारियों के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में नाविकों एवं नाव मालिकों के प्रशिक्षण के सम्बन्ध में निम्नलिखित आदेश दिए गए :-

    “नाविकों एवं मालिकों के प्रशिक्षण/उन्मुखीकरण हेतु बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मास्टर ट्रेनर्स तैयार करें। नदी घाटों पर नावों के निबंधन शिविरों के दौरान ही नाविकों एवं नाव मालिकों को प्रशिक्षित किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान नाविकों एवं नाव मालिकों को नाव दुघर्टनाओं के रोकथाम के उपायों के साथ.साथ सुरक्षित नाव परिचालन के नियमों के अनुपालन नहीं किये जाने की स्थिति में उनके विरुद्ध की जाने वाली क़ानूनी कारवाई/प्रावधानों की भी जानकारी दी जानी चाहिए ।”
    उपरोक्त्त के आलोक में बिहार राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण सुरक्षित नौका संचालन हेतु नाविकों एवं नाव मालिकों की क्षमता वर्धन एवं जन-जागरूकता हेतु 29 बाढ़ प्रवण जिलों के नाविकों एवं नाव मालिकों के प्रशिक्षण हेतु 8 समूह में मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है।


प्राधिकरण द्वारा सुरक्षित नौका परिचालन हेतु प्रशिक्षण प्राप्त मास्टर ट्रेनर्स की जिलावर सूची :-

  1. प्रथम समूह ( पटना, भोजपुर, बक्सर ) में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की सूची ।
  2. द्वितीय समूह (सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगुसराय) में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की सूची ।
  3. तृतीय समूह (खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, लखीसराय) में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की सूची ।
  4. चतुर्थ समूह (कटिहार, पूर्णिया, सुपौल) में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की सूची |
  5. पंचम समूह (मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मधुबनी) में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की सूची |
  6. छठा समूह (मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, शिवहर) में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की सूची |
  7. सातवाँ समूह (गोपालगंज, सीवान, किशनगंज ) में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की सूची |
  8. आठवाँ समूह (पश्चिम चम्पारण, अररिया, शेखपुरा, नालंदा) में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की सूची

नौकाओं के सर्वेक्षण / निबंधन हेतु सर्वेक्षकों एवं निबंधकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम


बिहार सरकार नाव दुर्घटनाओं को रोकने हेतु निरंतर प्रयासरत रही है। हैं। । आदर्श नौका नियमावली 2011 मे उल्लेखित नियमों के आलोक में सर्वेक्षक एवं निबंधन पदाधिकारी का यह दायित्व है कि वे नौकाओं में सुरक्षा संबंधी मानकों एवं आवश्यक जीवन रक्षा उपकरणों की उपलब्धता को सुनिश्चित करते हुए नौकाओं के निबंधन एवं सर्वेक्षण का कार्य प्रतिपादित करें जिससे राज्य में नौकाओं का संचालन सुरक्षित रुप से हो सके।
   नौका निबंधन एवं सर्वेक्षण के संबंध में अधतन स्थिति का अध्ययन कराया गया, जिससे ज्ञात हुआ कि जिलों में सर्वेक्षकों एवं निबंधकों को आदर्श नौका नियमावली 2011 की प्राप्त जानकारी नहीं है, जिससे नौकाओं का निबंधन फौरी तौर पर हो रहा है। जिससे लक्ष्य की प्राप्ति में कठिनाई हो रही है। प्राधिकरण स्तर पर इसे गंभीरता से लेते हुए निबंधकों एवं सर्वेक्षकों को प्रशिक्षित करने का संकल्प लिया गया एवं विशेषज्ञों की टीम गठित कर निबंधकों एवं सर्वेक्षकों के प्रशिक्षण देने के लिए माॅड्यूल तैयार किया गया।
   जिसके आलोक में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा नौका दुर्घटनाओं के न्यूनीकरण एवं रोकथाम तथा सुरक्षित नौका परिचालन राज्य के बाढ़ प्रवण सहित कुल 29 जिलों मे सभी प्राधिकृत निबंधक/सर्वेक्षकों का प्रशिक्षण का कार्य फरवरी माह में प्रारंभ किया गया I इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से बिहार आदर्श नौका नियमावली-2011 में वर्णित नियमों एवं प्रावधानों के बारे में प्रतिभागियों के संवेदीकरण एवं क्षमतावर्द्धन का कार्य किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान नावों की संरचना, उनके मुख्य भाग, नावों का निबंधन, भार क्षमता का आकलन, लोड लाईन का रेखांकन एवं अनुपालन, सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपकरणों की जानकारी, जैसे नाव रोकने के लिए लंगर, रात्रि में प्रकाश स्रोत की व्यवस्था, नावों में जीवन रक्षक एवं अग्निशमन आदि के उपकरणों की आवश्यकता एवं उपयोग के बारे में प्रतिभागियों को अवगत कराया जा रहा है ।



प्रशिक्षण प्राप्त सर्वेक्षकों एवं निबंधकों की सूची


अभियंताओं/वास्तुविदों/संवेदकों/राजमिस्त्रियों के लिए, भूकम्परोधी निर्माण एवं रेट्रोफिटिंग तकनीक से संबंधित प्रशिक्षण


 बिहार राज्य में भूकम्प का जोखिम और इसके प्रति अधिक संवेदनशीलता, इस बात से स्पष्ट होती है की राज्य के नेपाल से सटे आठ जिलें भूकम्प की दृष्टि से भूकम्प जोन 5 में आते हैं जो कि सर्वाधिक संवेदनशील है।

24 जिलें भूकम्प जोन 4 के अंतर्गत आते हैं एवं शेष 6 जिलें भूकम्प जोन 3 में आते हैं इस प्रकार लगभग पूरा बिहार संवेदनशील भूकम्पीय क्षेत्र में आता है। यह सर्वविदित है कि भूकम्प के कारण लोगों की मृत्यु नहीं होती परन्तु भूकम्प के कारण संरचनाओं के गिरने से लोगो कि मृत्यु एवं जान-माल की क्षति होती है। इस संदर्भ में, आपदा प्रबंधन के बदले परिदृश्य में भूकंपरोधी भवनों का निर्माण एवं पूर्व में निर्मित मकानों का रेट्रोफिटिंग कर उन्हें भूकंपरोधी बनाया जाना एक सकारात्मक पहल है जिसके लिए यह आवश्यक हो जाता है कि निर्माण कार्य में संलंग्न सभी साझेदारों का क्षमतावर्धन किया जाय एवं संवेदको तथा आमजन को भूकंपरोधी भवनों के निर्माण के संर्दभ में जागरूक किया जाए।

राज्य सरकार ने बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से, बिहार राज्य में, अभियंताओं/वास्तुविदों/संवेदकों/राजमिस्त्रियों के लिए, भूकम्परोधी निर्माण एवं रेट्रोफिटिंग तकनीक से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया है।


Training of Engineer in Chief, Chief Engineer and Superintending Engineer on Earthquake Resistant Buildings Reading Material (Presentations)
Training of Engineers 38 Districts of Bihar on Earthquake Resistant Buildings Reading Material (15 Presentations)


भूकम्परोधी निर्माण एवं रेट्रोफिटिंग तकनीक पर प्रशिक्षण प्राप्त  अभियंताओं/वास्तुविदों/संवेदकों/राजमिस्त्रियों की सूची:-



‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन’ पर मुखिया, सरपंच एवं अन्य पंचायत प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम

बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप में “सुरक्षित गाँव” के घटक के अंतर्गत पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया गया है और ग्राम स्तर आपदा प्रबंधन योजना बनाने और उसके क्रियान्वयन में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है । आपदा की प्रकृति स्थानीय होती है और इसके रिस्पांस हेतु समुदाय की सहभागिता अत्यन्त महत्वपूर्ण है। पंचायत प्रतिनिधि स्थानीय समुदाय के द्वारा ही निर्वाचित होते हैं और उनका स्थानीय समुदाय पर सीधा प्रभाव होता है। पंचायत प्रतिनिधियों की आपदा प्रबंधन के क्षे़त्र में जागरूकता एवं क्षमतावृद्धि से स्थानीय समुदाय पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा, जिससे आपदा रिस्पांस (बचाव एव राहत) के कार्य प्रभावी तरीके से संपादित किये जा सकेगें। आपदा से प्रभावित होने वाले समुदाय की नाजुकता (vulnerability) के विश्लेषण के लिए ग्राम सभा एवं पंचायत प्रतिनिधियों का जागरूक होना आवश्यक है। आपदाओं के प्रति पंचायत प्रतिनिधियों के जागरूक होने से स्थानीय समुदाय अपने स्थानीय प्रकृति के आपदाओं के विश्लेषण और उसके न्यूनीकरण, बचाव एवं रिस्पांस की योजनाऐं सटीक रूप से तैयार कर सकती हैं।
न जिम्मेवारियों के निर्वहन में पंचायतों का प्रशिक्षित होना नितांत आवश्यक है जिनके माध्यम से राज्य के प्रत्येक दूर दराज के गावों तक पहुंचा जा सकता है और आपदा प्रबंधन की संस्कृति जन-जन तक विखेरी जा सकती है। उपरोक्त्त के आलोक में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राज्य के 38 जिलों में सरपंच, मुखिया एवं अन्य पंचायत प्रतिनिधियों के “आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन” विषय पर राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजन कर रहा है | साथ ही, यह मास्टर ट्रेनर्स प्रखण्ड स्तर पर अपने जिले के अन्य सरपंच, मुखिया एवं पंचायत प्रतिनिधियों को आपदा न्यूनीकरण पर प्रशिक्षण प्रदान करेंगे ।


आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन पर मुखिया, सरपंच एवं अन्य पंचायत प्रतिनिधियों का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की  जिलावार सूची :-

बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों के आपदा प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन पर व्यावसायिक प्रशिक्षण

कार्यक्रम


भूमिका – बिहार एक बहु-आपदा प्रवण राज्य है | यह राज्य बाढ़, भूकम्प, सुखाड़, चक्रवाती तूफान, नौका दुर्घटना, वज्रपात, नदियों/ तालाबों में डूबने की घटनाएँ, अग्निकांड, असमय भारी वर्षा आदि आपदाओं से समय-समय पर प्रभावित होता रहता है |
लोक कल्याणकारी राज्य के दायित्वों में आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण स्थान है | आपदा प्रबंधन की अवधारणा में अमूल- चूक परिवर्तन होने के फलस्वरूप आपदा प्रबंधन में केवल राहत एवं बचाव ही नहीं अपितु रोकथाम, शमन, पूर्व तैयारियाँ, न्यूनीकरण, रेस्पोंस एवं पुर्नस्थापन/पुर्ननिर्माण की गतिविधियाँ शामिल हो गई हैं |
बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राज्य, जिला एवं अनुमंडल स्तर पर नीतियों के निर्माण एवं उनके क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं | अवधारणा परिवर्तन के उपरांत", यह आवश्यक हो जाता है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों को आपदा प्रबंधन अधिनियम, नीति, राज्य योजना, जिला योजना एवं बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोड मैप आदि का ज्ञान दिया जाए | उनका आपदा रेस्पोंस के समय लिए निर्धारित प्रशासनिक संरचनाओ तथा प्रशासनिक विशेषज्ञ बलों (NDRF/SDRF) के कार्यो की जानकारी भी हो | विशेष कर विभिन्न आपदाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं तथा मार्गदर्शिकाओं का अध्ययन तथा जिलास्तर पर इसके इस्तेमाल के संबंध में उनको अवगत होना अत्यावश्यक हो जाता है |
माननीय मुख्यमंत्री जी के आदेशानुसार बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के द्वारा बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का आपदा प्रबंधन एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन विषय पर बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान, फुलवारीशरीफ, पटना के सहयोग से दो दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है |
द्देश्य – इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है कि बिहार प्रशासनिक सेवा के सभी स्तरों यथा – अनुमंडल, जिला एवं राज्य के पदाधिकारियों को आपदा प्रबंधन के अवधारणा परिवर्तन के पश्चात नवजनित आयामों यथा – रोकथाम, शमन, न्यूनीकरण,त्वरित रेस्पोंस, पुर्नस्थापन एवं पुर्ननिर्माण आदि के बारे में पूर्ण जानकारी दी जाय | इसके अतिरिक्त बिहार राज्य की बहु- आपदा प्रवणता, आपदा प्रबंधन से संबन्धित संस्थागत ढाँचों, अधिनियम नीतियों राज्य आपदा प्रबंधन योजना, बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप तथा विभिन्न आपदाओं के प्रबंधन के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित मानव संचालन प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराते हुए उनका आपदा प्रबंधन हेतु उन्मुखीकरण एवं क्षमता वर्धन किया जाय | इस प्रशिक्षण से यह लाभ होगा कि आपदाओं के न्यूनीकरण एवं रेस्पोंस में गति आयेगी एवं किसी प्रकार के दुविधा की स्थिति से बचा जा सकेगा | आपदा से प्रभावित होने वाले समुदायों का बचाव, आपदा के जोखिम का न्यूनीकरण तथा आपदा पीड़ितों को ससमय साहाय्य उपलब्ध कराने में सहूलियत हो |
प्रशिक्षण – बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान, फुलवारीशरीफ, पटना के सहयोग से दिनांक 16.01.2018 से विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम को आरंभ किया गया है |


प्रशिक्षण में सम्मिलित होने वाले पदाधिकारियों की सूची निम्नवत है :-

आपदा में पशुओं का प्रबंधन पर पशुचिकित्सा पदाधिकारियों का चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम


बिहार बहु आपदा प्रवण राज्य है। जिसमें समुद्र तटीय आपदाओं को छोड़ कर सभी प्रकार के प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाएं आती है।
पदा जोखिम न्यूनीकरण रोड मैप 2015-30 में Resilient Village के साथ-साथ Resilient Livelihoods का भी लक्ष्य रखा गया है।
किसी प्रकार की आपदा आने पर ग्रामवासियों के समक्ष जीवन के साथ-साथ जीवन यापन की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। धन की क्षति भी हो जाती है। जीवन यापन के मुख्य साधनों में गाँवों में पशुधन महत्वपूर्ण अवयव हैं। पशुधन की सुरक्षा एवं संरक्षण के उपायों से एक ओर पशुधन की रक्षा हो सकेगी और दूसरी ओर उनके जीवन यापन के साधन भी रक्षा होगी। अर्थात पशुधन की सुरक्षा से एक ओर Resilient Village के लक्ष्य की प्राप्ति होती है तो दूसरी ओर Resilient Livelihoods के भी लक्ष्य प्राप्त हो जाते हैं।
परोक्त अवधारणा को ध्यान में रखते हुए पशुधन की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग एंव बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय के सहयोग से राज्य के सभी पशुचिकित्सकों को प्रशिक्षित एवं संवेदित करने के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया।
पर्युक्त वस्तुस्थिति के मद्देनजर ‘‘आपात स्थिति में पशु प्रबंधन ‘‘(Management of Animals in Emergencies)" विषय पर पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार सरकार के पशु चिकित्सकों के चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग एवं बिहार भेटनरी कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में तथा World Animal Protection (WAP) और Policy Perspectives Foundation (PPF) के सहयोग से बाढ़ सुरक्षा सप्ताह (1-7 जून, 2018) में दिनांक 04 जून से आरम्भ किया गया।
स प्रशिक्षण का उद्देश्य है कि बहु-आपदाओं की स्थिति में आपदा के पहले, आपदा के दौरान एवं आपदा के बाद में किस तरह से पशुओं की सुरक्षा एवं प्रबंधन किया जाय। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन 04 जून 2018 को बिहार भेटनरी कॉलेज के सभागार में श्री दिनेश चन्द्र यादव, माननीय मंत्री, आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार के कर कमलों द्वारा की गई। उद्घाटन सत्र में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री व्यास जी, सदस्य श्री पी0एन0 राय, बिहार पशु विज्ञान महाविद्यालय के कुलपति डा0 रामेश्वर सिंह, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव, डा0 एन0 विजयलक्ष्मी एवं बिहार भेटनरी कॉलेज के प्राचार्य तथा डीन डा0 सामंतरे ने भी भाग लिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए प्रशिक्षु पशु चिकित्सकों के उपयोग हेतु एक हस्तपुस्तिका तैयार किया गया है जो उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिया जा रहा है। प्रत्येक बैच में 35 पशु चिकित्सकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई हैं |
प्रथम चरण में 08 बैच का कैलेण्डर तैयार किया गया है जो निम्वत है --

              Management of Animal in Emergency Handbook


बैच संख्या

दिनांक

1

4-7 जून, 2018

2

15-18 जून, 2018

3

20-23 जून, 2018

4

27-30 जून, 2018

5

11-14 जुलाई, 2018

6

16-19 जुलाई, 2018

7

23-26 जुलाई, 2018

8

28-31 जुलाई, 2018

9

17-20 सितम्बर, 2018

10

26-29 सितम्बर, 2018

11

03-06 अक्टूबर, 2018

12

07-10 अक्टूबर, 2018

13

11-14 अक्टूबर, 2018

14

02-05 जनवरी, 2019

15

07-10 जनवरी, 2019

16

16-19 जनवरी, 2019

17

21-24 जनवरी, 2019

18

28-31 जनवरी, 2019

19

04-07 फरवरी, 2019

20

20-23 फरवरी, 2019

21

25-28 फरवरी, 2019

22

05-08 मार्च, 2019

23

11-14 मार्च, 2019

24

24-27 अप्रैल, 2019

25

03-06 मई, 2019

26

14-17 मई, 2019

27

20-21 मई, 2019

28

22-25 मई, 2019

29

28-29 मई, 2019

30

03-06 जून, 2019

31

12-15 जून, 2019

32

17-20 जून, 2019

33

26-29 जून, 2019


बाढ़ प्रवण प्रखण्डों/अंचलों में नव पदस्थापित प्रभारी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी/प्रभारी अंचल अधिकारियों का आपदा प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण विषय पर व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम


पृष्ठ भूमिः- बाढ़ पूर्व तैयारी की राज्य स्तरीय समीक्षात्मक बैठक दिनांकः-13.06.2018 के दौरान माननीय मुख्यमंत्री द्वारा चिन्ता जाहिर की गई कि जून माह में बड़ी संख्या में प्रखंण्ड विकास पदाधिकारी/अंचल अधिकारियों का स्थानान्तरण एवं पदस्थापन होता है। बहुत से ऐसे पदाधिकारी बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में पदस्थापित हो सकते हैं, जिन्हें पूर्व से बाढ़ से निबटने के लिए अपेक्षित अनुभव नहीं है जिससे आसन्न आपदा से निबटने में कठिनाई होगी। अतएव बैठक में उपस्थिति उपाध्यक्ष बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को जिम्मेवारी दी कि वैसे पदाधिकारियों को चिन्ह्ति कर उन्मुखीकरण किया जाय।

कार्ययोजनाः- निदेश के आलोक में बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के जिलधिकारियों से वैसे प्रखण्डों/अंचलों में नव पदस्थापित पदाधिकारियों की सूची की मांग की गई। सूची अप्राप्त रहने की स्थिति में बाढ़ एटलस 2013 एवं 2017 में चिन्ह्ति बाढ़ प्रवण पखण्डों/अंचलों से प्रखण्डों का चयन किया गया। साथ ही ग्रामीण विकास विभाग तथा राजस्व एवं भूमिसुधार विभाग द्वारा निर्गत स्थानान्तरण पदस्थापन अधिसूचना के आधार पर बाढ़ प्रवण प्रखण्डों एवं अंचलों में नव पदस्थापित होने वाले पदाधिकारियों की सूची तैयार की गई। इस प्रकार कुल 171 प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं 165 अंचल अधिकारी को चिन्ह्ति किया गया जो बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में नव पदस्थापित हुए हैं। पूर्व पदस्थापन प्रखंड/अंचलों के आधार पर इसकी प्राथमिकता वार सूची तैयार की गई तदोपरान्त बिपार्ड के सहयोंग से प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। प्रशिक्षण का माड्युल, वि0 प्र0 से0 के पदाधिकारियों के लिए तैयार माड्युल रखा गया तथा दिनांकः-17.07.2018 से दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण प्रारम्भ किया गया।

  

 

क्रम स०.

 

प्रशिक्षण में योगदान की तिथि

प्रशिक्षणार्थी

कुल प्रशिक्षणार्थी

प्रखंड विकास पदाधिकारी

अंचल अधिकारी

 1

 17-07-2018

 19

 7

 26

 2

 24-07-2018

 16

 11

 27

 3

 31-07-2018

 14

 21

 35

 4

 07-08-2018

 17

 21

 38

 5

 28-08-2018

 12

 14

 26

 6

 11-09-2018

 10

 16

 26

 7

 18-09-2018

 12

 17

 29

 8

 25-09-2018

 15

 12

 27

 9

 03-10-2018

 11

 12

 23

10

 11-10-2018

 8

 5

 13

11

 01-11-2018

 11

 10

 21







आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन विषय पर बिहार के सभी जिलों के चयनित प्रखण्डों के प्रमुख एवं जिला परिषद् अध्यक्ष का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

बिहार राज्य के बहु-आपदा के संबंध में प्रखण्ड स्तर तक आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन संबंधी जागरूकता के उद्देश्य से बिहार के सभी प्रखंडों के प्रमुख एवं जिला परिषद् अध्यक्ष का ‘‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन‘‘ विषय पर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आरंभ किया गया है। यह कार्यक्रम 12 बैचों में निम्न तालिका में दर्शाए गए तिथिवार किया जा रहा है।

बैच संख्या

दिनांक

कुल प्रशिक्षणार्थी की सूची

1

27-28 नवम्बर, 2018

 20

2

06-07 दिसम्बर, 2018

 37

3

11-12 दिसम्बर, 2018

15

4

18-19 दिसम्बर, 2018

 29

5

27-28 दिसम्बर, 2018

26

6

03-04 जनवरी, 2019

28

7

11-12 जनवरी, 2019

 17

8

17-18 जनवरी, 2019

13

9

30-31 जनवरी, 2019

 21

10

05-06 फरवरी, 2019

 25

11

12-13 फरवरी, 2019

 15

12

09-10 मई, 2019

 24

13

30-31 मई, 2019

 17

14

27-28 जून, 2019

 16

15

05-06 सितम्बर, 2019

 12

16

19-20 सितम्बर, 2019

 12

इस प्रशिक्षण के माध्यम से सभी प्रखंडों के प्रमुख एवं जिला परिषद् अध्यक्ष को बहु- आपदा के जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन के संबंध में जानकारी उपलब्ध करायी जा सकेगी और इसके द्वारा आपदाओं के जोखिम की पहचान कर उससे सामना करने हेतु उनका क्षमतावर्धन हो सकेगा तथा ’’बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोड मैप 2015-2030’’ के उद्देश्य के अनुरूप एक ‘‘सुरक्षित बिहार’’के संकल्प को पूरा करने में मदद मिलेगी।


“सुरक्षित तैराकी” कार्यक्रम

   पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ो के अध्ययन से यह तथ्य प्रकाश में आया है कि बाढ़ के दौरान एवं उसके बाद तालाबों, गड्ढों, नहरों, नदियों आदि में डूबने से होने वाली मौतें बहुतायत में होती हैं । बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा सहभागी प्रक्रिया के माध्यम से डूबने की घटनाओं की रोकथाम, जोखिम न्यूनीकरण एवं पूर्व तैयारी हेतु कार्य योजना का सूत्रण किया गया है। इस कार्ययोजना के सूत्रण हेतु बहुहितभागी एवं सहभागी प्रक्रिया द्वारा सामग्रियां जुटाई गयी तथा एक बहु-हितभागी ड्राफ्टिंग कमिटी का गठन किया गया। सामग्रियों को जुटाने एवं ड्राफ्टिंग कमिटी के गठन एवं कार्य में यूनिसेफ, पटना की महत्वपूर्ण भागीदारी रही । बांग्लादेश में बच्चों के डूबने की घटनाओं की अधिकता को देखते हुए वर्ष 2010 से 2015 तक बच्चों को समुदाय स्तर पर तैराकी का प्रशिक्षण दिया गया। जिसके फलस्वरूप वहाँ डूबने की घटनाओं में अत्यधिक कमी आयी। इसलिए कार्ययोजना के विकास में बांग्लादेश में सामुदायिक स्वंयसेवकों के सहयोग से संचालित किये गये तैराकी प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुभवों का भी सहयोग प्राप्त हुआ।  

  कार्ययोजना के अनुसार प्रथम चरण में “सुरक्षित तैराकी” कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के नदियों के 05कि0 मी0 की सीमा में अवस्थित गाँवों के तैराकी न जानने वाले अथवा तैराकी का अल्पज्ञान रखने वाले 06-18 वर्ष आयु वर्ग के बालक/बालिकाओं को तैराकी सिखाने का कार्य किया जाना है। इस कार्य हेतु नदियों के किनारे अवस्थित गाँवों के तैराकी जानने वाले युवक/युवतियों को “मास्टर ट्रेनर्स स” के रूप में प्रशिक्षित किये जाने की योजना है। मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण हेतु विभिन्न हितधारकों के सहयोग से प्रशिक्षण मॉड्यूल का निर्माण किया गया है। प्रशिक्षण मॉड्यूल में तैराकी एवं डूबते को बचाने हेतु सहायता एवं बचाव के विभिन्न तरीकों के बारे में कौशल विकास, बाल सुरक्षा के मुद्दों, सर्पदंश, बंशीजाल बनाना एवं उपयोग का तरीका, प्राथमिक उपचार, सी0पी0आर0, घरेलू संसाधनों के उपयोग से इम्प्रोवाइज्ड राफ्ट बनाने एवं इनके उपयोग को समाहित किया गया है। इस कार्यक्रम के दूसरे चरण में उन गांवों/मुहल्लों को भी शामिल किया जायेगा जिनमें बड़े तालाब एवं अन्य  जल निकाय अवस्थित होंगे तथा जिसमें नागरिक स्नानादि करते हों।

  उक्त आलोक में सर्वप्रथम गंगा नदी के किनारे स्थित गाँवों को लिया गया है तथा जिलों से प्राप्त तैराकों की सूची से मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण राज्य स्तर पर NINI, SDRF एवं UNICEF के सहयोग प्रारंभ किया गया है। जिसके प्रथम बैच में पटना जिले के पंडारक एवं मनेर प्रखड़ के गाँवों के तैराकों को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिसकी सूची निम्नवत हैः