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बिहार में डूबने से होने वाली मौतों की बढ़ती घटनाओं पर चर्चा करने के लिए दिनांक – 04-10-2016 को प्राधिकरण सभागार में बैठक ।

बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, श्री व्यास जी की अध्यक्षता में बिहार में पानी में डूबने से होने वाली मौतों की बढ़ती घटनाओं पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की गई। बैठक में यूनिसेफ़ के राज्य प्रमुख श्री यमीन मजूमदार के अतिरिक्त आपदा प्रबंधन विभाग, NDRF, SDRF, कुछ जिलों के नोडल पदाधिकारी तथा विभिन्न INGOs के प्रतिनिधि और प्राधिकरण के पदाधिकारी शामिल हुए । बैठक में इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचाव के उपायों पर विचार किया गया । बैठक के अंत में दो प्रमुख निर्णय लिए गये । सर्वप्रथम यूनिसेफ़ की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया, जिसमें आपदा प्रबंधन विभाग, NDRF, SDRF, RISU, प्राधिकरण और कुछ INGOs एवं समुदाय के सदस्य शामिल होंगें । यह कमेटी इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी । इसके अलावा यह भी निर्णय लिया गया कि आपदा प्रबंधन विभाग एवं प्राधिकरण द्वारा विज्ञापन एवं सलाहकारी निर्देशों के माध्यम से राज्य एवं ज़िला स्तर पर जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ।




आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने डूबने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन और आम लोगों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं-

  1. खतरनाक घाटों के किनारे ना तो खुद जाएं और ना ही किसी को जाने दें
  2. बच्चों को नदी या तालाब में नहाने से रोकें.
  3. यदि तैरना जानते हों तभी नदी/घाट के किनारे जाएं
  4. यदि जरूरी हो तो नदी के किनारे जाएं, परंतु नदी में उतरते समय गहराई का ध्यान रखें.
  5. डूब हुए व्यक्ति को धोती, साड़ी, रस्सी या बांस की सहायता से बचाएं.
  6. डूबे हुए व्यक्ति को पानी से निकालकर तुरंत आॅक्सीजन उपलब्ध कराएं. अगर ऑक्सीजन ना मिले तो कृत्रिम सांस मुँह से मुँह के द्वारा या अन्य विधि से.
  7. डूबते हुए व्यक्ति का पेट फूले होने की स्थिति में पेट से पानी निकालने की प्रक्रिया भी साथ-साथ की जाए.
  8. डूबे हुए व्यक्ति की नाड़ी (पल्स) बंद होने की स्थिति में तुरंत सीपीआर की कार्रवाई की जाए
  9. खतरनाक घाटों की पहचान कर उन पर खतरनाक/ चेतावनी का साइन लगाया जाए.